Thursday, 3 February 2011

कल रात भूल हो गयी उनसे


kanupriya.das · गर्भनिरोधक की हर खोज ने स्त्री को कुछ और मुक्ति दी है, कुछ और विकल्प दिया है . जीवन जीने की शैली का चुनाव, बच्चे होँ या न होँ , होँ तो कितने और कब? यह सब चुनाव तभी सम्भव हुआ जबसे गर्भनिरोधक का विकल्प उसे मिला. उससे पहले यदि विकल्प नाम की कोई वस्तु थी तो केवल विवाह करना या न करना हीँ .

अब यह नई इमरजेंसी गोली आ गयी है . इसके विज्ञापन में हीं कहा जाता है कि यह गर्भपात से बेहतर है. जो की गलत नहीं हो सकता. लेकिन क्या सथ मेँ यह न्ही बताया जाना चाहिए कि यह केवल अपातकाल के लिए है. इसका गर्भनिरोधक की तरह उपयोग नही होना चाहिए ? कोई जीवनकाल मेँ दो चार बार ले ले , तो समझा जा सकता है किंतु इसे बार-बार लिया जाए तो यह अपने शरीर के हार्मोंस के साथ खिलवाड है. कहीँ भी इसे नही बताया जाता कि कहुन इसे ना ले.

सिरदर्द की गोली की तरह यदि स्त्रियाँ इसका उपयोग करने लगेंगी तो इसका दिर्घकालिन परिणाम क्या होगा? शायद हमेँ पता नही है . हो सकता है कि गोली लेने के बाद केवल छोटो मोटे दुष्परिणाम हीँ होते होँ जैसे मितली, चक्कर , सिरदर्द फिर भी एक दुष्परिणाम होने का भय तो है हीँ . ठिक वैसे ही जैसे हर अच्छी वस्तु के साथ होता है. यह दो परिणाम हैँ ” यौन रोग” और पुरूष का अपने उत्तरदायित्व से मुँह मोडना .

यह बाज़ार की नई साजिश है. जो प्रो- मेन है . अब वह सोच सकते हैँ कि कोई गलती हुई तो यह गोली तो है न ! होना यह चाहिए की तम्बाकु उत्पादोँ के विज्ञापनोँकी तरह हीँ , इस गोली के विज्ञापन के साथ भी चेतावनी दिखाई जानी चाहिए . यह गोली बलात्कार या अन्य किसी आपदा मेँ वरदान साबित हो सकती है, किन्तु नियमित उपयोग के लिए नही है, यह ध्यान रखना चाहिए . जैसे हम हर स्थिति से निबटने के लिए प्लान “ए” और प्लान “बी” भी बनाते हैँ , वैसे हीँ यह गोली केवल प्लान बी हो सकती है. स्त्रियाँ वैसे हीँ अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह होती हैँ. कहीँ यह आपातकालिन गर्भनिरोधक गोली कोई आपदा हीँ न ले आए.

सलाना करीब 82 लाख गोलीयोँ की बिक्री को देखते हुए , दवा कम्पनियाँ , इसका खुब विज्ञापन कर रही हैँ , लेकिन दुरउपयोग को रोकने के बारे मेँ ज्यादा जागरूकता नही पैदा की जा रही. विज्ञापनोँ के चलते जो लोग इस बात को जान गयेँ हैँ , कि ये गोलियाँ , अनचाहे गर्भ को रोकती हैँ , लेकिन आपातकाल शब्द पर जोर नही दिया जा रहा है. सिप्ला की आई- पिल भारत मेँ सबसे ज्यादा बिकने वाला ब्राँड है, जबकी दूसरे ब्राँडो मेँ मैनकाइन्ड फार्मा का अन्वांटेड 72 तथा अन्य ब्रान्ड भी हैँ .

डॉक्टरोँ का बडा वर्ग , इनकी खुलेआम बिक्री का समर्थन करता है, हलांकि कुछ डॉक्टरोँ का मानना है कि इन्हे डॉक्टर की सलाह पर दिया जाना चाहिए. लोगोँ को समझना चाहिए कि एक आई-पिल नियमित गर्भनिरोधकोँ का विकल्प नही हो सकती. इसके साथ हीँ इसका इस्तेमाल आपातकाल मेँ ही करना चाहिए जिसका आशय पैदा किए गये आपातकाल से कतई नही है. यह गोलीयाँ एड्स का खतरा भी पैदा कर सकती हैँ . इन दवाओँ के बारे मेँ जरूरी निर्देषोँ को स्पष्ट रूप से प्रकाशित करने की तत्काल जरूरत है. साथ हीँ इनके दुष्प्रभावोँ और वैधानिक चेतावनी के बारे मेँ बताया जाना चाहिए . इससे इनका दुरउपयोग रूकेगा.ऐसा नही है कि इससे पहले महिलाओँ के लिए कोइ गर्भनिरोधक दवाई बाज़ार मेँ नही आई. लेकिन अब सिर्फ 72 घंटे मेँ ही सुरक्षा की गारंटी देती यह दवाईयाँ अपना युएसपी, इसे ही बना रही हैँ . सामाजिक मनोवोज्ञान के जानकार, इसके अन्य पहलूओँ को गम्भीरता से लेते हैँ , उनका मानना है , कि तेजी से बदलते भारत मेँ , इसका नुकसान ज्यादा है .

सिप्ला की वेबसाईट पर निचे गुलाबी रंग से यह साफ-साफ लिखा हुआ है: – इसका उपयोग डॉक्टरी सलाह पर हीँ किया जा सकता है ! साथ हीँ कम्पनी यह लिखना भी नही भूली है कि यह गोली गर्भपात की गोली नही है. भारत मेँ जहाँ नाम भर लिख लेने वालो को सक्षर मान लिया जाता है , वहाँ शिक्षा का प्रतिशत मात्र 64% है . ऐसे मेँ उन्हे अच्छा-बुरा कौन समझाएगा.

हलांकि इस विषय पर बहुत कुछ लिखा जा सकता है पर बेशर्मी की हद पार चुके व्यपार जगत से ज्यादा गुस्सा देश को दशा देने का दावा करने वाले न्यूज़ चैनल और अखाबारोँ मेँ इसके विज्ञापन को देख कर आता है . क्या दिखा रहेँ है यह लोग , अनचाहे गर्भ से मुक्ति दिलाने वाली गोलियोँ का विज्ञापन?

” मैँ अभी प्रेगनेंट नही होना चाहती हूँ – ” की पंच लाइन के साथ कल रात भूल हो गई? गोली खाइये और भूल से छुटकारा. और ऐसी गोलियाँ हैँ , तो डर किस बात का ? करिये भूल और अनचाहे गर्भ से मुक्ति ! क्या बेच रहे हो ? अनचाहे गर्भ से मुक्ति की गारंटी? क्या सिखा रहे हो ? – उन्मुक्त यौनाचार !

आज यह पिल्स युवाओँ की जरूरत बनती जा रही हैँ , इस पिल्स का मीडिया मेँ किया गया धुआँधार प्रचार जिसके कारण आज इस मॉर्निँग पिल्स का इस्तेमाल पार्ंपरिक गर्भ निरोधक के रूप मेँ किया जा रहा है . इसके कई दुष्प्रभाव हैँ . कम्पनी के अनुसार 72 घंटे के अनदर इस पिल्स का सेवन कर अनचाहे गर्भ से मुक्ति पाई जा सकती है. गोली लेनी से प्रेगनेंट होने की सम्भावना 69% तक घट जाती है . देखा गया है कि आजकल की कामकाजी महिलायेँ , इन पिल्स का बेखौफ और लापरवाही के साथ गर्भनिरोधक के रूप मेँ इस्तेमाल कर रही हैँ . यदि रोजाना सेक्स का आनन्द लेता है या लेना चाहता है तो इमरजेंसी पिल्स का सेवन ना करे. यह पिल्स एच. आई. वी से भी रक्षा नही करती . यह पिल्स कंडोम या बर्थ कंडोम की तरह नही है .

अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए अविवाहित लडकियाँ भी इस्तेमाल करने लगी हैँ . लड्कियाँ इसे एबार्शन पिल्स की तरह इस्तेमाल करती हैँ . सम्बन्ध बनाने के अगले दिन वह बेधडक इस पिल्स को खा लेती हैँ . जैसे रात को कुछ हुआ हीँ न हो , बस एक भूल के अलावा!

टी वी और मीडिया हमे एड्वांस बना रहे हैँ. और दवाई कम्पनियाँ अपना मुनाफा देख रहीँ है, अब ऐसे विज्ञापन आने पर अगर अपने पिता के साथ बैठी हो तो टी वी बन्द करने की जरूरत नही. अब आप देखिए खुशी से कल रात भूल करने और प्रेगनेंट नही होने के नुस्खे !

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