Thursday, 3 February 2011

पत्रकारिता के मिशन को कोई नहीं रोक सकता

पत्रकारिता के मिशन को कोई नहीं रोक सकता


वाराणसी। सूचना तकनीक और उच्च संसाधनों से आज का पत्रकार अधिक शक्तिशाली हुआ है। लेकिन, चारों ओर भ्रष्टाचार का बोलबाला होने से उसके समक्ष चुनौतियां भी बढ़ी हैं। इसके बावजूद पत्रकारिता के मिशन को कोई नहीं रोक सकता। ये बातें शनिवार को काशी विद्यापीठ में शुरू हुई सात दिनी कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व सांसद डा. रत्नाकर पांडेय ने कहीं।
विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग और पब्लिक रिलेशन सोसाइटी आफ इंडिया (पीआरएसआई) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला का विषय है जनसंपर्क एवं पत्रकारिता। विभागाध्यक्ष एवं संयोजक डा. अनिल कुमार उपाध्याय ने विषय प्रस्तावना पेश की। बतौर विशिष्ट अतिथि अमर उजाला के स्थानीय संपादक डा. तीर विजय सिंह ने भी स्वीकार किया कि पत्रकारिता व्यावसायिक हुई है, लेकिन उसका उद्देश्य आज भी वही है। तब आजादी के लिए पत्रकार लड़ता था और आज भ्रष्टाचार आदि के खिलाफ। उन्होंने विद्यार्थियों को जनसंपर्क और पत्रकारिता की कार्यशैली समझाते हुए कहा कि पीआरओ के लिए कौशल एवं वाकपटुता और पत्रकार के लिए विचार का होना बहुत जरूरी है। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के पूर्व एडिशनल डायरेक्टर प्रो. एमपी लेले ने बतौर विशिष्ट अतिथि कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में संभावनाएं अनंत हैं, लेकिन गुण और संस्कारों को बचाना होगा।
मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान संकाय के अध्यक्ष प्रो. राम मोहन पाठक ने कहा कि धन के आधार पर किया गया संपर्क जनसंपर्क नहीं होता। चरित्र और सिद्धांत पर आधारित संपर्क होना चाहिए। अध्यक्षता मानवीय संकाय के अध्यक्ष प्रो. अजीज हैदर ने की। इसके पूर्व अंगवस्त्रम् एवं स्मृति चिह्न भेंटकर अतिथियों का स्वागत किया गया। संचालन डा. विनोद कुमार सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन नरेश मेहता ने किया। अमिताभ भट्टाचार्य, प्रदीप उपाध्याय समेत कई वरिष्ठ पत्रकार, अध्यापक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे। तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं को व्यावहारिक ज्ञान दिया।

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