Monday, 6 December 2010

प्रतिभा और शक्ति का देश में ही उपयोगी हो


प्रतिभा और शक्ति का देश में ही उपयोगी हो
युवाओं को खोज और शोध के संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी - वन मंत्री सरताज सिंह
भोपाल, 5 दिसम्बर। वन मंत्री श्री सरताज सिंह ने कहा कि हमें अपनी युवा प्रतिभा और युवा शक्ति का अपने ही देश में उपयोग करना होगा। इसके लिये देश में ही युवाओं को खोज और शोध के संसाधन उपलब्ध कराने होंगे। तभी देश के विकास को नये आयाम मिल सकेंगे। दुनिया में वही देश आगे बढ़े हैं जिन्होंने तकनीकी विकास को महत्व दिया है।
वन मंत्री सरताज सिंह आज यहां ?समरूपी तकनीक एवं पर्यावरणीय अनुसंधान? विषय पर सर्च एण्ड रिसर्च यूथ कांग्रेस ? 2010 अन्तर्राष्ट्रीय सेमीनार के समापन अवसर पर सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारे देश की युवा पीढ़ी में विज्ञान विकास की ललक है। युवा शक्ति से हमारी अलग पहचान है। उन्होंने कहा कि हमारे देश के युवा विदेश में हैं और वहां कई प्रकार के अनुसंधान-अविष्कार कर रहे हैं। उनकी मेहनत और खोज का लाभ विदेश को ही मिलता है। हमें विचार करना होगा कि हमारे देश की युवा प्रतिभा विदेश में क्यों। हमें देश में ही युवा शक्ति को संसाधन एवं अवसर उपलब्ध कराने होंगे और वर्तमान कमियों को दूर करना होगा। ताकि देश की प्रतिभाओं का सही उपयोग हो सके।
श्री सरताज सिंह ने कहा कि कोई हमें दुनिया में शक्तिशाली बनने की तकनीक नहीं देगा। हमें अपनी प्रतिभा और ताकत का अपने ही देश में उपयोग करना होगा। वैज्ञानिक प्रगति हर क्षेत्र के लिये जरूरी है। केवल सामाजिक एवं आर्थिक ही नहीं देश की रक्षा के लिये भी हमें अपनी युवा शक्ति को नई खोज एवं अविष्कार के संसाधन देश में ही उपलब्ध कराने होंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संचालक तकनीकी शिक्षा श्री आशीष डोंगरे ने की। उन्होंने कहा कि तकनीकी के उपयोग में हमें परिपक्वता लानी होगी। सी.पी.आर.ई.के. क्षेत्रीय संचालक डा. बी.वी. राघवैया, वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डा. डी.पी. दुबे ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया। कार्यक्रम में शोध पत्र प्रस्तुतकर्ताओं को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में डा. मोनिका जैन ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर श्री विजय जोशी, श्री अनिल सिरवैया, श्री अनिल गुप्ता सहित रिसर्च स्कालर एवं युवा वैज्ञानिक उपस्थित थे। भोज विश्वविद्यालय के डायरेक्टर प्रो. प्रवीण जैन ने आभार व्यक्त किया।

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